निष्काम कर्मयोगी
श्री सीता राम यादव सेठ जी का सामजिक एवं राजनैतिक दृष्टिकोण (VISION)
- सीताराम यादव
मैनेजर (सेवानिवृत्त) भारतीय स्टेट बैंक आफ़ इण्डिया
मैनेजर (सेवानिवृत्त) भारतीय स्टेट बैंक आफ़ इण्डिया
आज परम आदरणीय श्री सीताराम यादव (सेठ जी) के 10वेंॅ परिनिर्वाण दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि।
श्री सीता राम सेठ जी के सरल स्वभाव, कर्मठता, सहज मिलनसारिता एवं उनके बहुआयामी व्यक्तित्व से तो आप सभी भलिभांति परचित है फिर भी उनके बहुआयामी व्यक्तित्व में से उनके सामाजिक एवं राजनैतिक दृष्टिकोण (टपेपवद) के कुछ संसमरण को आप सब से साझा करना चाहता हूँ।
समाज में व्याप्त अंधविष्वास, अवैज्ञानिक रीति-रिवाजों के अंधानुकरण जातिगत एवं उपजातिगत प्रतिद्वन्दिता आर्थिक असमानता तथा अशिक्षा, असंगठन आदि सामाजिक कमजोरियों से उनका हृदय अत्यन्त व्यथित रहता था वह सदैव उसमे सुधार करने के
परंतु आपसी प्रतिद्वंद्विता एवं अशिक्षा के कारण दो भागों में विभाजित थी जिसके एकीकरण के लिए सेठ जी काफी प्रयत्नशील थे समाज के सभी वर्गों को एकत्रित कर जगह-जगह गोश्ठिया एवं सभाएं कर लोगों को संगठित होकर एक साथ चलने का आवाहन करते थे। इस प्रकार निरंतर प्रयत्न करने पर मुंबई यादव महासभा के दोनों धड़ों का एकीकरण कराया और उसका प्रसार एवं पोषण करते रहे। उनके सरल व्यक्तित्व में ऐसा आकर्षण था एवं वाकपटुता थी कि उनको सभी लोग ध्यान से सुनते और समझते मानते और उनके कार्यों का समर्थन करते। थे परिणाम स्वरूप संगठन के साथ ही मुंबई नगर में कई शिक्षण संस्थान बनाया गया और यादव भवन के लिए जमीन की भी व्यवस्था की गई। इसी प्रकार अखिल भारतीय यादव महासभा का भी प्रसार करने में भी उनकी बड़ी भूमिका रही। यद्यपि यादव महासभा उत्तर भारत के हिंदी भाषी क्षेत्र में काफी सक्रिय थी।
परंतु दक्षिण भारत तक प्रसारित करने में सेठ जी की सराहनीय भूमिका रही है उसका परिणाम यह हुआ कि तमिलनाडु मद्रास के श्री डी.नागिन्द्रन जी को अखिल भारतवर्शीय यादव महासभा के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। इसी संदर्भ में मुझे वर्ष 2000 में अखिल भारतीय यादव महासभा के तिरुपति अधिवेशन में सेठ जी की प्रेरणा से सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त हुआ 2 दिन पहले ही में अमेरिका से भारत आया था और श्री सेठ जी के भिवंडी मुंबई आवास पर ठहरा था। उस अधिवेशन में उनके साथ मेरे अतिरिक्त श्री श्याम नारायण यादव नगरसेवक मुंबई एवं मुंबई यादव महासभा के अध्यक्ष बाद में सगड़ी आजमगढ़ से विधायक, श्री राम उजागीर यादव मुंबई नगर के नवोदित उद्योगपति एवं चार अन्य संभ्रांत व्यक्ति एक साथ ट्रेन द्वारा तिरुपति गए। दक्षिण भारत का यह सर्वप्रथम पहला अखिल भारतीय यादव महासभा का ऐतिहासिक अधिवेशन था। जिसमें समाज के अधीकांष लोग सम्मिलित हुए थे समाज के कई दिग्गज राजनेता विधायक सांसद मंत्री एवं गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति थी जैसे श्री श्याम लाल यादव उपसभापति राज्यसभा भी इस प्रकार सुधार एवं सामाजिक संगठन की बात करते और अन्य सब जातियों के साथ मिलकर रहने एवं आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित करते तथा उनको यथा सम्भव आर्थिक सहायता भी करते थे, इसी क्रम मे मुझे स्मरा है कि वर्ष 1964 में बी.काम. परीक्षा उत्तीर्ण कर रोजी-रोटी (नौकरी) की खोज में मुम्बई गया वहां पर समाज के लोगों से मुलाकात हुई वैसे सेठ जी के संबंध में मेरी जानकारी पहले से थी। परंतु मुंबई प्रवास में उनके निकट आने का भी सौभाग्य हुआ तब मैंने पाया की मुंबई यादव महासभा थी
बारे में जिक्र करते थे सभी शोषित समाज के लोगो में व्याप्त कुरीतियों एवं अशिक्षा के संबंध में समझाते थे और सबको आपस मे संगठित व शिक्षित होकर अपने अधिकारो के प्रति जागरूक रहने का संदेश देने के साथ-साथ उनके सगठन की स्थापना एवं उसका पोषण भी किया करते थे, यही नहीं कि यादव समाज के लिए कार्य करते थे बल्कि सभी पिछड़ी अनुसूचित एवं अनुसूचित जनजातियों एवं मुस्लिम विरादरी के लोगों के लिए
भारत सरकार, न्यायमूर्ति श्री बनवारी लाल यादव एक्टिंग चीफ जस्टिस पटना हाई कोर्ट, श्री लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री बिहार सरकार, श्रीमती कांति सिंह सांसद इसके अलावा तमिलनाडु केरल आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक के गणमान्य राजनेता मंत्री विधायक एवं सांसद तथा उसी समय हैदराबाद हाई कोर्ट में नियुक्त जस्टिस एक महिला नाम में भूल गया हूं उपस्थित हुए। यह अधिवेशन 2 दिन तक चला जिसमें समाज के शैक्षिक राजनीतिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए अनेकों प्रस्ताव पारित किए गए। दक्षिण भारत के बालक बालिकाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रात भर चला वहां के लोगों का प्रबंध एवं उत्साह बड़ा ही सराहनीय था।
विभिन्न पारित प्रस्ताव में एक अति महत्वपूर्ण प्रस्ताव को पारित किया गया उसका उल्लेख करना मैं उचित समझता हूं जैसा कि हम सब जानते हैं कि उत्तर भारत के समाज ने अपना एक सर्वमान्य सरनेम टाइटल यादव रखा है जिससे समाज के सभी लोगों को जाति बोध हो जाता है परंतु ऐसा दक्षिण भारत के समाज में कोई सर्वमान्य सरनेम नहीं है वहां विभिन्न प्रकार के सरनेम टाइटल रखे हुए है। इसलिए इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई कि समाज के सभी लोग यादव सरनेम रखें परंतु यह व्यवहारिक रूप से होना संभव नहीं था क्योंकि ऐसा करने से नाम परिवर्तन की अनेकों विधिक कार्यवाही करनी पड़ती तथा सभी इस बात पर एकमत थे कि यादव कामन टाइटल ही रखा जाए। सर्वसम्मति यह प्रस्ताव पारित किया गया कि समाज के सभी लोग अपने नवजात बच्चों का एक समान ‘‘यादव’’ टाईटल रखेंगे जिससे आगे चलकर उनकी भी पहचान आसान हो सके ऐसा सब करने में सेठ जी के सराहनीय सहयोग से ही संभव हो सका।
श्री सेठ जी अखिल भारतीय स्तर पर संगठन के प्रचार प्रसार करने के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर भी संगठन को मजबूत करने में वह महत्वपूर्ण योगदान किए अपने मूल जनपद जौनपुर, उत्तर प्रदेश में भी संगठन कई गुटों में बटा हुआ था। उनके आपसी मतभेद समाप्त कर एकजुट करने में उनकी भूमिका सराहनीय है। इसी प्रकार जौनपुर जनपद के आसपास अन्य जनपदों में दौरा करके लोगों को एक बैनर के नीचे लाने एवं एकत्रित कर संगठित करने का काम किए। तमाम उप जातीय ग्रुपों में बटे हुए लोगों में एक सूत्र में पिरोने का काम भी उन्होंने किया। आपसी प्रेम सौहार्द एवं उपजातियों में आपसी शादी विवाह का प्रचलन कराया।
श्री सेठ जी के ही प्रयास से जौनपुर शहर में यादव छात्रावास के निर्माण हेतु श्री राम दास यादव एडवोकेट, श्री दया शंकर यादव एडवोकेट, श्री लक्ष्मी शंकर यादव मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य संभ्रांत यादव बंधुओं के देखरेख में जमीन क्रय किया गया है परंतु किन्ही कारणों से अभी तक उस जमीन पर कोई निर्माण नहीं हो सका है जबकि ऊपर नामित सभी सदस्यों का निधन हो चुका है इस कारणवश भी निर्माण लंबित हो गया है। आशा है कि उनके उत्तराधिकारी छात्रावास भवन निर्माण कार्य पूरा करने में सहयोग करेंगे।
श्री सीताराम सेठ जी कमजोर वर्ग के बच्चों की शिक्षा चिकित्सा एवं कन्याओं के विवाह आदि के लिए यथोचित आर्थिक सहायता भी किया करते थे। ऐसे कार्यों के लिए उनका मानना था कि अगर दाहिना हाथ दान करता है तो बायें हाथ तक को भी पता नहीं चलना चाहिए। इस प्रकार की सहायता का प्रचार नहीं होना चाहिए कदाचित उनके जीवन काल में मैं इस प्रकार लिखने का साहस करता तो वह बिल्कुल ही असहमत होते और मैं ऐसा नहीं लिख पाता।
उनका मानना था कि सामाजिक चेतना के साथ-साथ राजनैतिक चेतना भी होनी चाहिए बिना राजनैतिक आधार के समाज का कल्याण इतना अच्छा नहीं हो सकता जितना होना चाहिए। इसको ध्यान में रखते हुए राजनीति में भी यथोचित उनकी उपस्थिति रहती थी वह राजनीति के प्रारंभिक समय में कांग्रेस पार्टी भिवंडी मुंबई का सक्रिय नेतृत्व किया करते थे। भिवंडी नगर के वह ऑनरेरी मजिस्ट भी नियुक्त किए गए थे और इस सम्मानित पाद पर काफी समय तक आसीन थे। उसके पश्चात चौधरी चरण सिंह की भारतीय क्रांति दल बीकेडी की स्थापना में भी सेठ जी सक्रिय भूमिका रही। बाद में माननीय मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व समाजवादी पार्टी की स्थापना में उनकी सक्रिय भूमिका रही समाजवादी पार्टी के स्थापना में उनकी सक्रिय भूमिका रही समाजवादी पार्टी के शीर्ष सदस्यों में उनका नाम अंकित है।
सेठ जी समाजवादी पार्टी की केंद्रीय एक्जक्यूटीव कमेटी के आजीवन सदस्य रहे। श्री मुलायम सिंह यादव जी जब भी मुंबई जाते वह सेठ जी के निवास पर अवश्य जाया करते थे। इसी प्रकार वह अपने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री काल एवं अन्य अवसरों पर सेठ जी के पैतृक आवास ग्राम रमदेईया जौनपुर जाया करते थे। वह सेठ जी का बड़ा आदर सम्मान करते थे और उनके सुझावों को मनोयोग से सुनते एवं उस पर समुचित कार्यवाही करते । श्री मुलायम सिंह यादव से बिना समय लिए जब भी सेठ जी चाहते थे मिल सकते थे कोई रोक टोक नहीं थी। जब सेठ जी श्री मुलायम सिंह यादव जी से मिलते तो वे अपने प्राइवेट कक्ष में वार्तालाप करते थे। श्री सेठ जी हमेषा सामाजिक उत्थान एवं संगठन का कार्य निष्काम भाव से करते थे । वह समाज के किसी संगठन या संस्थान में कोई पद नहीं लेते थे बल्कि अन्य सुयोग्य व्यक्ति को उत्तरदायित्व देते और उसका सहयोग एवं संरक्षण करते, ऐसे निष्काम कर्मवीर थे सेठ जी।
श्री सेठ जी के सामाजिक एवं राजनीतिक उत्थान एवं संगठनात्मक अनेक प्रयासों का उल्लेख करना सूरज को दिया दिखाने जैसा है वह समाज के सभी कमजोर एवं उपेक्षितों के कल्याण एवं उत्थान के मसीहा थे।
लेखक - सीताराम यादव
मैनेजर (सेवानिवृत्त) भारतीय स्टेट बैंक आफ़ इण्डिया
के साथ सेठ जी के समधी हैं सेठ जी के बड़े पुत्र श्री अजय यादव से इनकी बेटी श्रीमती सुमन यादव का विवाह हुआ है। यह उस परिवार में नाना जी के नाम से ही पुकारे जाते हैं।
मैनेजर (सेवानिवृत्त) भारतीय स्टेट बैंक आफ़ इण्डिया
के साथ सेठ जी के समधी हैं सेठ जी के बड़े पुत्र श्री अजय यादव से इनकी बेटी श्रीमती सुमन यादव का विवाह हुआ है। यह उस परिवार में नाना जी के नाम से ही पुकारे जाते हैं।


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