Saturday, November 26, 2022

लल्लन पहले अपने मित्र सीताराम को तैयार तो करो हम तैयार हैं ।

 राज्यसभा सदस्य बनाने के लिए सहर्ष स्वीकार कर बोले लल्लन पहले 
अपने मित्र सीताराम को तैयार तो करो हम तैयार हैं । 


महामानव स्वर्गीय सीताराम सेठ जी, जो जो हमारे अभिभावक परममित्र व भार्गदर्शक के रूप में 
रहे है। आज उनके विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यो का उल्लेख करते हुए अपार हर्श हो रहा है। 
साथ ही साथ दुख हो रहा कि काश कुछ दिन वह और रहे होते तो विभिन्न क्षेत्रों में हम सब का 
और मार्ग दर्शन व विकाश होता।
आप एक कुशल व्यवसायिक व्यक्ति थे आप के इस क्षेत्र में काम देखकर हमें जमशेद जी टाटा जी 
की जोवनी याद हो रही है उन्होंने अपने कामगारों को अपना परिवार माना उनके सुख दुख में 
उनके साथ रहे, यही गुण उनको देश का सर्वोच्च उद्योगपति बनाया. आप भी महामानव को तरह 
अपने कामगारो से मिलकर अपना व्यवसाय ही नहीं बल्कि परिवार बनाकर प्रगति के पथ पर चलते रहे। सामाजिक कार्यो में तो आप का अतुलनीय गुण रहा है, जाति धर्म से हटकर आप में मानवधर्म का गुण था, आप मानवता आर न्याय के पथ के पथिक रहे। 

राजनैतिक क्षेत्र में आप में राजनीतिज्ञ तो नहीं थे, अपितु एक कुशल राजनीतिज्ञ परामर्शदाता के 
रूप में रहे, इसलिए माननीय स्व. मुलायम सिंह यादव आप पर विशेष भरोसा रखते थे, और 
आप को सलाह लेते थे, आप अक्सर माननीय स्व. मुलायम सिंह यादव जी से मिलने जाते हुए 
हमेशा मुझे साथ ले जाते थे, और खुलकर अपनी बात उनके सामने रखते थे।
मुझे आज यह कहते हुए अपार हर्श हो रहा है, कि एकबार माननीय स्व. मुलायम सिंह यादव 
राज्यसभा सदस्य बनाने के लिए सहर्ष स्वीकार कर बोले लल्लन पहले अपने मित्र सीताराम को
तैयार तो करो, हम तैयार है। लेकिन जब हम अपना व नेता जी का विचार आपके सामने रखा 
है नहीं, अपितु आप से निवेदन भी किया तो आपने तुरंत इनकार करते हुए यह कहा, कि आज 
हमें सबकुछ मिल गया, हमें नेता नहीं बनना है, केवल एक मित्र की परिभाषा जानता हूँ उसी का े 
निभा रहा हूॅं, और आप अन्तिम समय तक उसे निभाए, इसीलिए आप की बिमारी को सूचना 
मिलते ही नेता जी आप से मिलने आप के निवास भिवंडी पर आए। 
इन सब गुणों का कारण आपका आध्यात्मिक ज्ञान था, आप सदैव अपने ऊपर ईश्वर का आशीर्वाद 
मानते थे। आप में दिखावा नहीं बल्कि वास्तविकता थी, इन्हीं गुणों के कारण सन् 1982 से अंत 
तक मैं एक मित्र को भाँति आप के सानिध्य में रहा।
अंत में यह कहना चाहता हूॅं कि आप मेर े मागदर्शक, अभिभावक ही नहीं वल्कि एक मित्र की 
भाँति सदैव मेरे मन-मस्तिष्क व हृदय में विराजमान रहें। इन्हीं स्मृतिया के साथ आपको कोटिषः 
बार सादर नमन व प्रणाम “ईश्वर आप को अपन शरण में स्थान दिए है, यह मेरा विश्वास है। 

ओम शांति-शांति’

-लल्लन कुमार यादव 
शास्त्री नगर जोग ेष्वरी मुंब

No comments:

Post a Comment

मैं आश्चर्यचकित रहा

  उनकी सरलता देखकर मैं आश्चर्यचकित रहा  - डा.रामयश यादव  सबसे पहले माननीय सीताराम सेठ जी को सादर नमन करता हूँ। और इनके विषय में मैं बताना चा...