Tuesday, January 10, 2023

सीताराम जी इसी तरह की शख्सियत है।

 पूर्वांचल ने बहुत सारी विभूतियों को पैदा किया है 
- सीताराम जी इसी तरह की शख्सियत है।

-चौ.अम्बिका चौधरी ( पूर्व मंत्री उ. प्र.)


पूर्वांचल ने बहुत सारी विभूतियों को पैदा किया है उसमें ऐसे लोगों का विशेष उल्लेख होता है जो लोग साधारण परिवारों से साधारण परिस्थितियों से निकले अपने कौशल और उन्होंने अपने परिश्रम से अपने उद्यम से उन्होंने अपने लिए एक बड़ी जगह बनाई और समाज के लिए एक बड़े बरगद के पेड़ की तरह तमाम लोगों को जो तपिश से आए उनको छाया देने का काम किया। सीताराम जी इसी तरह की शख्सियत है। न कि जौनपुर बल्कि पूर्वांचल तो विशेष रूप से लेकिन जो भी उनके पास गया उसको वह बहुत उदार हृदय से उसको जिस तरह की जरूरत थी उस तरह की मदद उन्होंने दिया। राजनीतिक रूप से जितना मैं उनको जानता हूं वह माननीय नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव जी के इतने प्रिय थे और इतने नजदीक थे, अभिन्न सहयोगी थे और मैं बहुत जिम्मेदारी से यह बात कह सकता हूं कि नेताजी को ऐसे लोगों का सहयोग प्राप्त था यह सौभाग्य की बात है। उन्होंने बहुत मदद की लेकिन उस संदर्भ में किसी से भी किसी भी तरह की चर्चा नहीं की, यहां तक की 2-4 शब्दों में भी यह बात किसी को नहीं बताई, इस तरह के सहयोगी वह नेताजी के थे। जहां तक हमारा सवाल है हम लोग दूर से उनको जानते थे, मेरे पास कोई ऐसा संस्मण नहीं है जिसको की निजी तौर पर मैं यहां साझा करूं लेकिन उनके बाद उनके पुत्र श्री अजय जी हम लोगों के मित्र हैं हमारे छोटे भाई की तरह हैं उन्होंने हमेशा अपने परिवार की परंपराओं की तरह से हम लोगों का सम्मान करते हैं। यहां पर विशेष उल्लेख मैं इसलिए करना चाहूंगा कि जिन हालात में वह मुंबई गए और जो लोग ऐसे हालात में वहां गए उनको वह उन हालात में वहां नहीं रहने दिए और उनके पहुंच जाने पर पहले दिन से ही तमाम ऐसे लोग हैं हजारों लोग हैं जिनको उन्होंने संरक्षण दिया। 

अपने लिए उन्होंने जैसे भी दिन गुजारे हो लेकिन उनके यहां पहुंचने के बाद किसी को भी उन्होंने और परिस्थितियों में नहीं गुजरने दिया ऐसी उनके बारे में चर्चा आम है। बड़े लोगों की बड़ी मदद और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के तो वह बड़े संरक्षक रहे हैं, जो भी उनके पास गया बिना किसी भेदभाव के उन्होंने उनकी मदद की है मैं केवल यहां पर आर्थिक पक्ष की बात नहीं कर रहा हूं बल्कि हिम्मत देने का काम, हौसला बढ़ाने का काम और यहां तक की अगर जरूरत पड़े तो उनके लिए छोटी बड़ी सिफारिश करने का काम उन्होने किया। अब यह जरूर है कि जौनपुर वाले उसमें सौभाग्यशाली हैं कि ज्यादा उनके हिस्से में आया और यह भी स्वाभाविक है कि जौनपुर में अपनी माटी से उनका ज्यादा लगाव था, इसकी वजह से जौनपुर वालों को उसका कुछ ज्यादा लाभ मिला।जौनपुर के अलावा भी जो लोग भी वहां तक पहुंच सके वहां से कोई निराश होकर नहीं आया, यह उनकी बड़ी भारी विशेषता थी और स्वभाव की उदारता के अलावा वह बहुआयामी व्यक्तित्व था उनका। हम बड़े-बड़े नेताओं के बारे में जब चर्चा करते हैं उनके गुणों की उनके आचरण की हम लोग कमोबेश उसको थोड़ा बढ़ा करके  करने की बात करते हैं।एक ऐसा व्यक्ति जो देश की पार्लियामेंट में नहीं गए  देश के कोई मंत्री नहीं हुए,  लेकिन बावजूद इसके राजनीति में समाज के लिए जो समझदारी और योगदान होना चाहिए उसको और उसमें अपनी जितनी भूमिका होनी चाहिए उस भूमिका को उन्होंने जिस ढंग से निर्वाह किया। एक उदाहरण हो सकता है और प्रेरणा ली जा सकती है।यह सच है कि इस रिवाज के लोग बहुत  समाज में होते नहीं और है भी नहीं, और आज भी जब  नेताजी की चर्चा होती है उनके सहयोगियों की चर्चा होती है तो प्रचलित तौर पर सेठ जी के नाम से भी उन को संबोधित करते थे और जब सेठ जी कहते थे तो यह मान लिया जाता था कि जब नाम नहीं ले रहे हैं तो उन्हीं की चर्चा हो रही हैं। जब जब बात आती थी तो एक अलग छवि उनकी सभी लोगों में थी खासकर समाजवादी परिवार में सभी लोगों में विशेष रूप से, जो लोग भी उन तक पहुंचे जो लोग नहीं भी पहुंचे उनका जितना भाग्य सौभाग्य हो।आज आवश्यकता इस बात की जरूर है कि हम देखते हैं कि गांधीजी सेठ जमना लाल बजाज के बगैर अपने उद्देश्यों को उस तरह से प्राप्त नहीं कर सकते थे, या कोलकाता जाते हुए गांधी जी को एक निश्चिंतता होती थी, लोहिया जी को निश्चिंतता होती थी कि वह वहां जा रहे हैं तो उनको देखने वाले लोग वहां हैं। 


नेताजी के जीवन में जो थोड़े से लोग ऐसे रहे हैं मैं समझता हूं कि उनमें सेठ जी की भूमिका वैसी ही समझनी चाहिए । हम लोगों ने जितना उसको देखा है खास करके समाजवादी पार्टी के गठन के बाद और खास करके पार्टी का विस्तार करने के लिए जिन लोगों को दी गई और महाराष्ट्र में जब समाजवादी पार्टी बनाने की बात आई तो उसमें बहुत सारे लोग जुड़े, मैं उसमें नाम लूं तो देवानंद से भी अपने समय में जुड़कर नेताजी ने काम लिया राज बब्बर तो काफी समय जुड़े भी रहे बड़ी जिम्मेदारियां उनको मिली। लेकिन हमारे प्रदेश के जो बड़े नेता लोग हैं मैं स्वर्गीय शारदा नंद अंचल का नाम लेना चाहूंगा मैं बलराम जी का नाम लेना चाहूंगा, जब महाराष्ट्र में पार्टी के विस्तार की बात करेंगे तो इन सबको आधारभूत रूप से जो सहयोग और समर्थन मिला उसमें हम सेठ सीताराम जी का उल्लेख करेंगे, क्योंकि सबसे आगे बढ़कर उनका नाम आएगा बगैर उनकी मदद के यह सब काम संभव नहीं था। 

यह सही बात है कि आज समाजवादी पार्टी वहां नहीं है जहां शुरुआत में आई थी तत्कालीन समय में कई विधायकगण मंत्री हुए विधायक हैं और आज भी विधायक हैं। लेकिन उस दौर को याद करता हॅूं तो खुद मेरी पृष्ठिभूमी का स्मरएा हो आता है, जब मेरे पिता जी कलकत्ता गए थे गांव के एक व्यक्ति से 10 रूपये कर्ज लेकर गए थे सबसे पहले उन्होंने उसको किया इसलिए मैं समझ सकता हूं उन परिस्थितियों को जब उन्को याद करता हूं तब अपने पूज्य पिता जी की स्मृतियां ताजी हो जाती हैं, उनको पुनः मैं उसी भाव और छवि के साथ स्मरण करता हूं और जिनका नाम रहा जो लोग अनाम रहे और उनके साथ रहे उन पर उनकी दुआएं रहीं और वे भी जिनपर उनकी अपार कृपा रही उनसब की तरफ से उनकी स्मृतियों को नमन करता हूं। मैं उनके चरणों मे अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।



-चौ.अम्बिका चौधरी 
( पूर्व मंत्री उ. प्र.)


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