Tuesday, January 10, 2023

मेरा बहुत देर से उनसे संपर्क हुआ



 मेरा बहुत देर से उनसे संपर्क हुआ

- श्रीराम यादव

इस समय मैं उनके जौनपुर के आवास पर हूं, यहां मुझे कई बार आने का मौका मिला, सबसे पहले तो मैं उन्हें धन्यवाद करता हूं और अपनी विनम्र श्रद्धांजलि देता हूं, उन्हें याद करता हूं। जो कुछ मेरी स्मृतियों में है उनके लिए यहां मैं बताना चाहूंगा कि मेरा बहुत देर से उनसे संपर्क हुआ। जहां तक मैं समझता हूं कि 1993 के चुनाव के बाद जिस समय उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का गठबंधन था और पूरे प्रदेश में इस गठबंधन की एक लहर थी 15 पचासी का नारा बहुत तेजी से गूंज रहा था, ऐसा लगता था कि उत्तर प्रदेश से जैसे किसी बात की शुरुआत हो गई है।

अब मैं चुनाव जीतकर जब लखनऊ गया और वहां जाने के बाद सरकार का गठन हुआ तो मैं पहली बार विधायक हुआ था और मुझे पहली बार में ही उस सरकार की कैबिनेट में मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई यह बहुत ही सौभाग्य की बात थी। ऐसे में जितने भी लोग हमारे समाज के प्रतिष्ठित लोग थे हमें आशीर्वाद देने लखनऊ आए । समय-समय पर उन लोगों का आशीर्वाद मिलता रहा उनमें हमारे स्वर्गीय सीताराम यादव जी जो समाज को उठाने और एक नई दिशा देने के लिए बराबर काम करते रहे उनसे मुलाकात हुई। लखनऊ में कमोबेश बीसीयों बार उनसे मुलाकात हुई। तब मैं बहुजन समाज पार्टी में था उसके बाद जब मैं 1996 में समाजवादी पार्टी में आया जब गठबंधन टूटा था उसके बाद भी मुलाकात हुई।

उनके बारे में जो बातें हमें जानने को मिली वह यह है कि एक सामान्य से परिवार में पैदा होकर और गांव से निकलकर के जिस तरह से उन्होंने संघर्ष किया और अपने समाज के काफी लोगों को साथ ले कर के भी वह चले लोगों को रोजगार दिया मुंबई जैसे शहर में जाकर समाज के लोगों को और समाज के तमाम गरीब लोगों को काम धंधे में लगाया लोगों को प्रेरणा दिया उनका यह कर्तव्य बहुत ही प्रेरणादायक है। जो मैंने उनके विषय में जाना उसमें इन्होंने समाज को एक दिशा देने का काम किया और उसी के साथ साथ राजनीति में जिस तरह से माननीय मुलायम सिंह यादव उन दिनों देश में पिछड़ों के दलितों के विशेष करके माननीय राम मनोहर लोहिया जी के विचारों को लेकर के समाज को जगा रहे थे, जगाने का काम कर रहे थे लोगों में चेतना फैलाने का काम कर रहे थे उसमें बहुत बड़ी भूमिका मुंबई जैसे शहर से महाराष्ट्र जैसे प्रांत से उनको मदद देने का काम यदि किसी ने किया तो जहां तक मेरी जानकारी है वह स्वर्गीय सीताराम यादव जी थे। उन्होंने बहुत बड़ा सहयोग उनको दिया था, आर्थिक सहयोग भी किया और राजनीतिक सहयोग किया जिससे वह आगे बढ़ सके। मैं समझता हूं कि माननीय मुलायम सिंह यादव जी जब तक स्वर्गीय सेठ जी जिंदा थे जितना सम्मान मैंने देखा चाहे वह मुंबई हो या लखनऊ आने पर या सैफई जाने पर या दिल्ली जाने पर जिस तरह से नेताजी उनका सत्कार और सम्मान करते थे वह देखने से ही लगता था, कि वह इतने बड़े मददगार थे माननीय मुलायम सिंह यादव जी के। उन्होंने अपने पूरे जीवन में संघर्ष किया, संघर्ष के साथ-सथ

 अध्यात्म की तरफ भी उनका रुझान था, लगातार वह गढ़वा घाट संतमत आश्रम में जाते रहे, तमाम लोगों को उन्होंने प्रेरित भी किया सद्मार्ग पर चलने के लिए, गढ़वा घाट निरंतर उनका आना-जाना लगा रहा, जहां तक मेरी जानकारी है मुंबई में भी इन्होंने एक आश्रम की स्थापना कराई है जिससे समाज का बहुत बड़ा हित साधन हो रहा है, यहां पर भी लोग संतमत विचारधारा की विचारों से ओतप्रोत हो लाभान्वित हो रहे हैं।  सच्चे मार्ग पर चलने का प्रयास कर रहे हैं इस तरह से देखा जाए तो उनका बहुत लंबा संघर्ष रहा है उस संघर्ष से उन्होंने समाज को दिया है अपने परिवार को दिया है। मैं समझता हूं कि माननीय मुलायम सिंह यादव जी से मिलने के बाद उन्होंने देश के लिए भी बहुत बड़ा योगदान दिया है। इससे अधिक उनके बारे में क्या कहा जा सकता है वह महान व्यक्तित्व के धनी थे।

मुझे एक घटना याद आती है क्योंकि मैं बहुत गरीब परिवार से निकलकर राजनीत में आया था, मैं समझता हूं कि सेठ सीताराम जी भी उसी तरह से संघर्ष करके आगे आए थे यहां तक पहुंचे थे मुझे लगा बहुत अच्छे सहयोगी हैं मार्गदर्शक हैं मैंने उन्हें लखनऊ से फोन किया मैंने फोन पर उनको कहा कि देखिए मैंने थोड़ा बहुत वेतन वगैरह से बचा कर के रखा है, उन दिनों इतनी गाड़ियां नहीं हुआ करती थी, केवल महिंद्रा की जीप हुआ करती थी और उस समय महिंद्रा की ही एक नई गाड़ी निकली थी आरमदा और टाटा सुमो निकली थी मैंने फोन पर बात किया तो उन्होंने कहा कि आप आ जाइए और मैं यहां से दिलवा देता हूं। मैं समय निकालकर स्वयं वहां तक गया इसी बहाने मैं उनके मुंबई स्थित घर पर भी रुका वहीं पर रुक कर खाना पीना खाया उसके बाद उन्होंने मुझे वह गाड़ी दिलवाई, बड़े कंसेशनल रेट पर उन्होंने वह गाड़ी हमें दिलवा दी उसको मैंने काफी दिन तक चलाया । उससे मैंने दो चुनाव लड़े, मैंने देखा कि कोई चाहे कितने भी बड़े पद पर पहुंच गया हो चाहे छोटे पद पर हो सबके लिए उनके मन में समान भाव और हर एक की मदद का जज्बा हुआ करता था। उनकी सहायता और सहृदयता ही उनका आभूषण था, उनसे कभी किसी को शिकायत नहीं रही है मैं समझता हूं पूरे जौनपुर में चाहे वह राजनीति करने वाला हो चाहे बिजनेस करने वाला हो कोई नहीं कह सकता है कि उनसे किसी प्रकार से किसी को कोई नाराजगी हुई हो या किसी को कोई दुख हुआ हो। वह बहुत अच्छे व्यक्ति थे उन्हें अभी रहना चाहिए था, वह बहुत जल्दी चले गए हम लोगों के बीच से।



श्री श्रीराम यादव
पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार

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